जानकारी के अनुसार फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में गजेंद्र सिंह धाकड़ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया गया था। निलंबन आदेश मिलने के बाद उन्होंने मनगवां थाने के रोजनामचा में स्वयं को बीमार बताते हुए ‘सिक’ की एंट्री दर्ज कराई थी। इसके बाद वे थाने से रवाना हो गए, लेकिन फिर कभी विभाग के संपर्क में नहीं आए। न तो उन्होंने किसी वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क किया और न ही अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई जानकारी दी।
विभागीय नियमों के तहत निलंबन के बाद उन्हें पुलिस लाइन रीवा में आमद देना अनिवार्य था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। लगातार अनुपस्थित रहने के कारण विभाग ने उन्हें कई बार नोटिस जारी किए। हालांकि इन नोटिसों का भी कोई जवाब नहीं मिला। इससे मामला और अधिक संदिग्ध एवं चिंताजनक बनता चला गया।
जब विभागीय स्तर पर संपर्क के सभी प्रयास विफल हो गए तो पुलिस ने उनके ग्वालियर स्थित पैतृक निवास पर भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया। वहां भी उनकी मौजूदगी की पुष्टि नहीं हो सकी। परिजनों ने भी उनके लंबे समय से संपर्क में न होने को लेकर चिंता व्यक्त की है। बताया जा रहा है कि परिवार अपने स्तर पर भी उनकी तलाश में जुटा हुआ है, लेकिन अब तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पुलिस ने तकनीकी जांच को प्राथमिकता दी है। जांच एजेंसियां उनके मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), अंतिम सक्रिय लोकेशन, फोन गतिविधियों और संभावित संपर्कों की जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निलंबन के बाद उन्होंने किन लोगों से बातचीत की और आखिरी बार उनकी लोकेशन कहां दर्ज हुई थी।
जांच टीम उन लोगों से भी पूछताछ कर सकती है जो हाल के दिनों में उनके संपर्क में रहे हों। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से कोई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है, जिससे उनकी वर्तमान स्थिति का पता लगाया जा सके।
रीवा पुलिस अधीक्षक गुरकरन सिंह ने बताया कि निलंबित निरीक्षक गजेंद्र सिंह धाकड़ अभी भी गैरहाजिर हैं। उन्होंने पुलिस लाइन में आमद नहीं दी है और विभाग के संपर्क में भी नहीं हैं। उनकी लोकेशन ट्रेस करने और वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
फिलहाल यह मामला पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का 102 दिनों तक बिना किसी सूचना के लापता रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें तकनीकी जांच के नतीजों पर टिकी हैं, जिनसे इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद की जा रही है।
