मौसम विभाग के अनुसार मानसून वर्तमान में महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों के आसपास ठहराव की स्थिति में है। पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंचने के बाद इसकी प्रगति बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल क्षेत्र में भी धीमी हो गई है। परिणामस्वरूप मध्य भारत, उत्तर भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्से अब भी पर्याप्त वर्षा से वंचित हैं।
देश के लगभग 17 राज्यों में सामान्य मानसूनी गतिविधियां अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सकी हैं। इनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। इन क्षेत्रों में किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ने लगी है क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई का समय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार मानसून के आगमन के बाद शुरुआती अवधि में सामान्य रूप से 53.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होती है, जबकि इस बार अब तक केवल 19.2 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह सामान्य से लगभग 64 प्रतिशत कम है। इतनी बड़ी कमी ने कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियों की आशंका को जन्म दिया है, हालांकि विशेषज्ञ फिलहाल इसे स्थायी संकट मानने के बजाय अस्थायी मौसमीय व्यवधान बता रहे हैं।
उपग्रह चित्रों में भी मानसूनी बादलों की सक्रियता सामान्य वर्षों की तुलना में काफी कम दिखाई दे रही है। आमतौर पर जून के मध्य तक मध्य और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से घने बादलों से ढके रहते हैं, लेकिन इस बार कई क्षेत्रों में बादलों की उपस्थिति सीमित नजर आई है। इससे वर्षा की तीव्रता और विस्तार दोनों प्रभावित हुए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को मानसून का अस्थायी ठहराव माना जा रहा है। इसके पीछे ऊपरी वायुमंडल में चल रही हवाओं के पैटर्न को प्रमुख कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी हवाओं की जेट स्ट्रीम सामान्य स्थिति से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिसके कारण मानसून को आगे बढ़ाने वाली पूर्वी हवाओं की प्रणाली प्रभावित हुई है। यही कारण है कि मानसून की गति कमजोर पड़ गई है।
हालांकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में कई राज्यों में वर्षा गतिविधियों में सुधार की संभावना जताई है। पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों, विशेषकर बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी वर्षा के संकेत हैं। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में गरज-चमक के साथ वर्षा और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी सप्ताह में मानसून दोबारा सक्रिय होता है तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। फिलहाल कृषि क्षेत्र, जलाशयों के जलस्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों को देखते हुए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले कुछ दिन मानसून की दिशा और उसकी तीव्रता तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
