श्रद्धालुओं ने पवित्र शिप्रा नदी में स्नान कर अपने आराध्य देवों की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान, मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ का वातावरण दिनभर बना रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाया।
धर्माचार्यों के अनुसार इस बार सोमवती अमावस्या का महत्व इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि यह अधिकमास के अंतिम दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि जब अमावस्या सोमवार के दिन आती है तो उसका पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही अमृत सिद्धि योग और अन्य शुभ संयोगों ने इस दिन को और भी विशेष बना दिया है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस दिन किए गए स्नान, जप, तप, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए धार्मिक कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सोमवती अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की शांति और मोक्ष की कामना से तर्पण और श्राद्ध कर्म भी किए। शिप्रा तट पर सुबह से ही पंडितों और श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त किए गए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
उधर, Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple सहित उज्जैन के प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर अपने परिवार और देश की खुशहाली की कामना की। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए थे।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार दोपहर सूर्य का वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश भी एक विशेष परिवर्तन माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रह-नक्षत्रों के इस परिवर्तन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
धर्माचार्यों का कहना है कि अधिकमास में यदि कोई व्यक्ति दान-पुण्य, व्रत या विशेष धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर पाया हो तो सोमवती अमावस्या उसके लिए विशेष अवसर लेकर आती है। इस दिन श्रद्धा भाव से किए गए दान और सेवा कार्यों को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसी कारण श्रद्धालुओं ने अन्नदान, वस्त्रदान और अन्य धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
पूरे दिन उज्जैन की धार्मिक गलियों, मंदिरों और घाटों पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही। शिप्रा तट पर उमड़ी भीड़ और भक्तिभाव से सराबोर वातावरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उज्जैन केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है।
